Saturday, July 2, 2016

कभी कभी...




कभी कभी तन्हाई से बातें किया करते है,
तन्हाई में भी सुकून तलाश लिया करते हैं.
दुनिया में फुर्सत किसे है किसीका दर्द सुनाने की,
हम तो अपने सारे गम ऐसे ही बाँट लिया करते हैं.

मिलता नहीं जब कन्धा कोई सर रख के रोने को,
अश्कों की श्याही से कागज रंग दिया करते हैं.
कुछ नाकाम सपने, कुछ हसरतें तो कुछ यादें हैं,
जिन्हे लब्जो में पिरोया करते हैं.

कभी कभी तन्हाई से बातें किया करते है,
भा गया हैं तन्हाई को भी साथ मेरा.
अब तो वो भी पूछा करती हैं हाल मेरा,
शायद वो भी तन्हा हैं बेचारी मेरी तरहां.

रोज कहती हैं कल वापस जरूर आना देने साथ मेरा,
वादा लेती है वापस लौट के आने का.
अब बस यही हैं जो देती हैं हरपल साथ मेरा,
कभी कभी तन्हाई से बातें किया करते है.

कभी कभी तन्हाई से बातें किया करते है,
हम तो अपने सारे गम ऐसे ही बाँट लिया करते हैं.


बसंत कुमार वर्मा

Power of Pen - "The PEN is MIGHTIER than the SWORD"

One day one of my friend asked me that why are you writing, why are you spending time with pen,
You should sped that time in Gym for body building , I replied him with bellow lines



ऐ शूरमा शमशीर पे इतना गुरूर न कर,
हमने भी अपनी कलम में कई तूफनी जज्बे भर रखें हैं।

हर एक फैसला तू जंग से ना कर,
कई फैसले तो लेखनी ने अपनी नोक तले धर रखें हैं॥


बसंत कुमार वर्मा

ज़िन्दगी..??

You must remember the famous bollywood song "ज़िन्दगी ऐक सफर है सुाहन, यहाँ कल क्या हो किसने जाना,"

I have tried to explain same kind of feeling in bellow lines



ऐक अनजान सफर सी यह ज़िन्दगी गुजरती जा रही है,
उमंग हैं थमी पर धड़कन धड़कती जा रही हैं,
चाह नई है बाकी अब इस दिल में कोई, फिर भी....
अनजान चाह के पीछे-पीछे यह ज़िन्दगी चलती जा रही है,

ना पथ है, ना पथिक, अनजान है मंजिल भी, फिर भी...
ऐक अनजान सफर में यह ज़िन्दगी चलती जा रही है,
हर पग, हर पथ पर सिर्फ दिलसे ही मिले है, फिर भी...
बस एक और मौके की तलाश में इम्तेहान दिए जा रही है..

इम्तेहान दिए जा रही है..चलती जा रही है..ज़िन्दगी..
ऐक अनजान सफर सी ये ज़िन्दगी गुजरती जा रही है.

बसंत कुमार वर्मा

ये कोनसा दौर हैं ??

A full mixture of mood.... 

(When u are sitting lonely and thinking about something for a long and found NO CONCLUSION..!!!) 
ना शांत हैं, ना शोर हैं, 
इक धुंध सी चारो ओर हैं, 
दिल में उठे सवालों का, 
यह कोनसा दौर हैं.....? 

(When you think this is your happiest moments and few hours latter you realize that the moment was not as happiest as it can overcome the worst thing which just came to you...!!!)
कभी मधुबन में नाचता मोर हैं, 
कभी शांत से साहिल का कोई छोर हैं, 
बनते-बिखरते बुलबुलों का, 
यह कोनसा दौर हैं.....? 

(When you need someone...don't be panic, I mean someone who still in relationship with you..!! but not with you to hug you, hold you....but still you can feel the warmness of that hug could be.) 
ना पास कोई, ना कोई दूर हैं, 
दूरियों के आगे हर कोई मजबूर हैं, 
फसलों में सिमटे रिश्तों का, 
 यह कोनसा दौर हैं.....? 

(You are tooooo busy in your work environment OR get bored with your daily schedule..hope something to be change....) 
ज़िन्दगी तो आजकल जैसे कोई दौड़ हैं, 
अंजान पथ का, यह कोनसा मोड़ हैं, 
उमंगों में छुपी वीरानियों का, 
यह कोनसा दौर हैं.....? 

(Something broken...something crying inside you... Mostly just after break-up) 
दुनिया की भीड़ में, तन्हाइयों का शोर हैं, 
गुमनाम इस दुनियां में, अँधियारा हर इक ओर हैं, 
सन्नाटे में गूंजती पुकार का, 
यह कोनसा दौर हैं.....? 

(Govt. System, Bloody Politics and their Vote bank theory...) 
भ्रष्ठ, कपट स्वार्थ ही चहुँ ओर हैं, 
सीने में लोगों की, दिल नहीं कुछ ओर हैं, 
निपट स्वार्थ की इस मलीन दुनिया का, 
यह कोनसा दौर हैं.....? 

(No one can forget Delhi victims...) 
अबला अस्मत के लुटेरे फैले हर इक ओर हैं, 
किसे पुकारे यहाँ, जब दिखता हर कोई चोर हैं, 
सत्ता, शाशन और बिगड़े परिवेश का, 
यह कोनसा दौर हैं.....? 

(This bloody Corrupt System need to be changed....but it's can't be done by only ONE..) 
मैं तो हूँ, पर नई हैं हम, 
आंख भी हैं थोड़ी नम, 
बस अपनी ही धड़कनो का शोर हैं, 
यह कोनसा दौर हैं.....? 
यह कोनसा दौर हैं.....? 


 बसंत कुमार वर्मा

Tuesday, January 25, 2011

Is 26th Jan, a reason of Celibration now.....?

First of all I am sorry if I am spoiling your patriotic spirit...

I wrote what I thought, I don't know what you think....but it's true..it is the real situation in India

I started writing this one since 15th Aug, 2010, that day I only wrote it's title and today (25th Jan, 2011) I completed it...

Hope you agree with my thoughts.....


स्वतंत्र हैं गणतंत्र का पराधीन यहाँ,
कोंन कहता है के "हैं हम स्वतंत्र" यहाँ |
गर गणतंत्र का दमन चक्र ऐसे ही चलता रहा,
तो बताओ क्या है स्वतंत्रता का मतलब यहाँ ||

आज खुद से ही यह सवाल पूंछ हैं सब खामोश यहाँ,
शायद बस विचार ही हैं अब स्वतंत्र यहाँ |
क्या कहूँ आज के इस भारत को,
स्वतन्त्र या फिर हैं सिर्फ गणतंत्र यहाँ ||

जन साशन का अर्थ हैं, जन शोषण यहाँ,
सत्ता बनी हैं सिर्फ टकसाल यहाँ |
इस दिन को कैसे मनाऊं क्या नाम दूँ,
गणतंत्र दिवस.......???
या स्वतंत्रता की पुन्यातिथी कहना हैं शायद सार्थक यहाँ ||

********** Lines are added latter after Delhi Nirbhaya Kand **********
देख अस्मत लुटती अबला की, रहते है सब मोन यहाँ ।
सीश जवानों के कटाके, शोक तक ना जताती सरकार यहाँ ।।
दुर्योधन , दुशासन और शकुनी जैसे है आजाद और ध्रितारास्त्र है गणतंत्र यहाँ ।
स्वतंत्र हैं गणतंत्र का पराधीन यहाँ, कोंन कहता है के "हैं हम स्वतंत्र" यहाँ ||
********** Lines are added latter after Delhi Nirbhaya Kand **********

स्वतंत्र हैं गणतंत्र का पराधीन यहाँ,
कोंन कहता है के "हैं हम स्वतंत्र" यहाँ |
स्वतंत्र हैं गणतंत्र का पराधीन यहाँ,
कोंन कहता है के "हैं हम स्वतंत्र" यहाँ ||


बसंत कुमार वर्मा 

Thursday, September 23, 2010

Ayodhya KAAND.........

First of all I am sorry to all those people who got hurt by this one.....I am really sorry

Here I am sharing only those old lines which came in my mind when I was a 12 years old little kid.

Generally I don't use to share my own written lines on public place but today I thought that, It is the time I must have to share. The reason why I am sharing is that why this thing is still untouched by all those brilliant minds who always ready to fight on “Ayodhya Mandir-Masjid Mudda”

I don't think it is a big issue as compared to corruption, starving, global warming and lots more.
When we have such giant issues which impacting our nature, our children's future but we are fighting together on these “Hindu-Musalim Muddaa’s”

Here are few lines which I want to share and trying to open our politician’s eyes, more of that people's eyes who execute politician's plans 

मंदिर हटाकर मस्ज़िद बनाते, 
मस्ज़िद हटाकर मंदिर।
आपस में लड़ते रहते ये दोनों धर्म के भाई,
फिर भी अपने आप को भारतीय कहलाते??

अरे, भारतीय तो वो होते हैं, जो सभी धर्मो को भुला
भाई भाई की तरहां रहते हैं।
मंदिर हटा दो मस्ज़िद हटा दो,
वहां पर एक सुन्दर स्वछ विद्यालय बना दो॥

जिसमे पढ़कर साक्षर हो हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई,
भारत को प्रगति के पथ पर लेके जाएँ ये चारो भाई।
तब ना होंगे दंगे-फसाद, ना जाना होगा कोर्ट-कचेरी में,
तब ना होगा अयोध्या-कांड इस पुरे कलयुग में॥

Please think once....

Basant Kr. Verma

Friday, March 19, 2010

LOVE

Love is Just a Word until you find someone to give it a Definition...


True I posted it so long ago, now updating with my finding till now





प्यार कोई लफ्ज नहीं,प्यार कोई हर्फ़ नहीं,
प्यार कोई दवा नहीं, प्यार कोई मर्ज नहीं,

पापा की नज़रों में इससे बढ़कर कोई गुन्हा नहीं,
आशिक़ों से पूछो तो इससे ज्यादा कहीं मजा नहीं,

संतों की माने तो इससे पाक कोई दुवा नहीं,
गर जो सुनलो पीर एक टूटे दिल की, तो दोस्त...
इससे बढ़कर कोई सजा नहीं....


बसंत कुमार वर्मा